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राज्य सरकार उपभोक्ता संरक्षण के कार्यक्रमों को उच्च प्राथमिकता देती है और राज्य में विशेषकर जन-स्तर पर वह एक मजबूत तथा व्यापक आधार वाले उपभोक्ता आन्दोलन को बढावा देने के लिए अत्यन्त उत्सुक हैं। उपभोक्ता की विभिन्न समस्याओं को ध्यान में रखते हुए केन्द्र सरकार ने एक व्यापक उपभोक्ता संरक्षण कानून अर्थात्, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 बनाया है| जिसका उद्देश्य उपभोक्ता की शिकायतों को सरल तरीके से कम खर्च पर और अल्पावधि में निपटाना है। लेकिन राज्य में एक मजबूत उपभोक्ता आन्दोलन को बढावा देने के लिये समाज के प्रत्येक वर्ग विशेषकर युवकों, महिलाओं को, इसमें अपना योगदान देना है। उपभोक्ता संरक्षण के क्षेत्र में युवकों महिलाओं तथा अन्य व्यक्तियों द्वारा किये गये प्रयासों को मान्यता देने तथा उन्हें प्रोत्साहन देने की दृष्टि से, राज्य सरकार ने वर्ष 1989 से उपभोक्ता संरक्षण के लिये पुरस्कार/प्रशस्ति-पत्र प्रदान करने की एक योजना प्रारम्भ की हुई है। इस योजना के अन्तर्गत पुरस्कार/प्रशस्ति-पत्र निम्न प्रकार दिये जाते हैंः

  1. युवा पुरस्कार: राज्य स्तर पर 15,000, 10,000 तथा 5,000 रु. की पुरस्कार राशि के रूप में 3 पुरस्कार दिये जाते हैं। इन पुरस्कारों को प्राप्त करने वालों को प्रशस्ति-पत्र भी दिये जाते हैं।
  2. प्रशस्ति-पत्र: राज्य स्तर पर 3 व्यक्तियों को तथा प्रत्येक जिले में एक व्यक्ति को प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया जाता है।

युवा पुरस्कार/प्रशस्ति-पत्र के लिए पात्रता

उपभोक्ता संरक्षण के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले 20 से 40 वर्ष की आयु वर्ग के सभी युवक-युवतियाँ राज्य स्तरीय युवा पुरस्कार के लिए पात्र हैं। प्रशस्ति-पत्र हेतु सभी व्यक्ति, जिन्होंने उपभोक्ता संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया है, पात्र हैं। इस योजना के अन्तर्गत आवेदन करने वाले व्यक्तियों के कार्यों को उनके द्वारा निम्नलिखित में से किसी एक या अधिक क्षेत्र में किये गये कार्य के आधार पर आंका जायेगाः-

  1. महत्वपूर्ण उपभोक्ता कार्य शुरू करना,
  2. उपभोक्ता शिकायतों के प्रतितोष के लिए प्रयास करना,
  3. उपभोक्ता संरक्षण तथा स्वास्थ्य हेतु खतरनाक वस्तुओं से सुरक्षा के लिए नये विचार प्रस्तुत करना|
  4. प्रदर्शनियों, संगोष्ठियों, प्रदर्शनों आदि के जरिए, विशेषकर छोटे कस्बों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ता आन्दोलन को बढ़ावा देना|
  5. विशिष्ट उपभोक्ता समस्याओं के संबंध में उपभोक्ता अनुसंधान अथवा जाँच करना|
  6. कोई भी अन्य कार्य करना, जिसका प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से उपभोक्ता संरक्षण क्षेत्र में योगदान हो तथा स्वैच्छिक उपभोक्ता आन्दोलन के संदेश का प्रसार हो।

युवा पुरस्कार/प्रशस्ति-पत्र के लिए किस प्रकार आवेदन करें:

  1. यह पुरस्कार/प्रशस्ति-पत्र प्रत्येक केलेण्डर वर्ष (1 जनवरी से 31 दिसम्बर तक) से संबंधित होगा।
  2. आवेदक अपनी गतिविधि की रिपोर्ट की दो प्रतियां संबंधित जिला कलेक्टर को भेजेगा। रिपोर्ट में स्पष्ट शीर्षों के तहत आवेदक की गतिविधियाँ दी जाएँगी और उसका संक्षिप्त परिचय (बायोडाटा) भी दिया जाएगा।
  3. रिपोर्ट साफ-साफ लिखी होनी चाहिए और यदि संभव हो तो डबल स्पेस टाइप कराया जाए।
  4. आवेदक को स्पष्ट रूप से यह उल्लेख करना होगा कि इस योजना के अन्तर्गत उसके द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर उसका स्वत्वाधिकार (कॉपीराइट) का कोई दावा नहीं होगा और सरकार को आवेदक द्वारा भेजी गई सामग्री को प्रकाशित करने का अधिकार होगा।
  5. रिपोर्ट जिला कलेक्टर के पास 31 जनवरी तक पहुंच जानी चाहिए।

युवा पुरस्कार तथा राज्यस्तरीय प्रशस्ति-पत्र हेतु चयन की प्रक्रियाः

  1. संबंधित जिला कलेक्टर आवेदक की गतिविधियों का सत्यापन करेगा। यदि जिला कलेक्टर कार्य को प्रशंसनीय पाता है तो आवेदक द्वारा प्रस्तुत-रिपोर्ट की एक प्रति अपनी सिफारिशों तथा टिप्पणियों के साथ राज्य सरकार (उपभोक्ता मामले विभाग) को भेजेगा।
  2. आवेदक के कार्य का मूल्यांकन करते समय जिला कलेक्टर विशेष रूप से इस बात को देखेंगे कि उसके कार्य का उपभोक्ताओं के कल्याण पर क्या प्रभाव पड़ा है।
  3. जिला कलेक्टर की सिफारिश तथा टिप्पणियां, गतिविधियों की रिपोर्ट के साथ अधिक से अधिक 15 फरवरी तक राज्य सरकार के पास पहुँच जानी चाहिये।
  4. चयन एक समिति द्वारा किया जाएगा, जिसमें सचिव, उपभोक्ता मामले विभाग, उपभोक्ता संरक्षण के प्रभारी अधिकारी तथा एक प्रख्यात व्यक्ति, जिन्होंने उपभोक्ता संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया हो, शामिल होंगे। उक्त प्रख्यात व्यक्ति को उपभोक्ता मामले विभाग द्धारा नामित किया जावेगा। समिति की सिफारिशों को उपभोक्ता मामले मंत्री, राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित किया जावेगा।
  5. राज्य सरकार के पास यह अधिकार सुरक्षित होगा कि वह किसी वर्ष यदि किसी आवेदक को इस पुरस्कार/प्रशस्ति-पत्र के लिए पात्र नहीं पाये, उस वर्ष हेतु किसी भी व्यक्ति को पुरस्कार/प्रशस्ति-पत्र प्रदान नहीं करे।

जिला स्तरीय प्रशस्ति-पत्र हेतु चयन प्रक्रियाः

  1. संबंधित जिला कलेक्टर आवेदक की गतिविधियों का सत्यापन करेगा तथा उसके कार्य का मूल्यांकन करते समय इस बात को देखेगा कि उसके कार्य का उपभोक्ता के कल्याण पर क्या प्रभाव पड़ा है।
  2. प्रशंसनीय कार्य करने वाले व्यक्ति का चयन एक समिति द्वारा किया जावेगा। जिसके अध्यक्ष जिला कलेक्टर होंगे। स्वयंसेवी संगठनों का जिला कलेक्टर द्वारा नामित एक प्रतिनिधि, (जिसने उपभोक्ता संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया हो) एवं जिला प्रमुख इस समिति के सदस्य होंगे तथा जिला रसद अधिकारी इस समिति का संयोजक होगा।
  3. समिति द्वारा चयनित व्यक्ति का नाम तथा उसके किये गये कार्य का संक्षिप्त ब्यौरा जिला कलेक्टर द्वारा राज्य सरकार के अनुमोदन हेतु 15 फरवरी तक उपभोक्ता मामले विभाग को भिजवाया जावेगा।
  4. राज्य सरकार के पास यह अधिकार सुरक्षित होगा कि यदि वह किसी वर्ष किसी व्यक्ति को इस प्रशस्ति-पत्र के लिये पात्र नहीं पाये तो उस वर्ष हेतु प्रशस्ति-पत्र प्रदान नहीं करे।