• Rajasthan, India

चुनने का अधिकार

अर्थात जहां संभव हो विभिन्न किस्म की वस्तुओं तथा सेवाओं की प्रतिस्पर्धी मूल्यों पर सुलभता का आश्वासन पाने का अधिकार/एकाधिकार के मामले में इसका अभिप्राय उचित मूल्य पर संतोषजनक गुणवत्ता और सेवा का आश्वासन पाने का अधिकार है । इसमें बुनियादी वस्तुओं तथा सेवाओं का अधिकार भी शामिल है । ऐसा इसलिए है क्योंकि प्रश्न चयन हेतु अल्पसंख्यकों के अप्रतिबंधित अधिकार के कारण बहु-संख्यकों को उनका समुचित हिस्सा नहीं मिल पाएगा । इस अधिकार का बेहतर उपयोग उस प्रतिस्पर्धात्मक बाजार में किया जा सकता है जहां विभिन्न किस्म की वस्तुएं प्रतिस्पर्धात्मक मूल्यों पर उपलब्ध होती हैं ।

सूचित किए जाने का अधिकार

अर्थात माल की गुणवत्ता, मात्रा, प्रमाणिकता, प्रभाविकता, शुद्घता, मानक और मूल्य के बारे में सूचित किए जाने का अधिकार ताकि अनुचित व्यापारिक व्यवहार से उपभोक्ताओं को बचाया जा सके ।

उपभोक्ता को चयन करने अथवा निर्णय लेने से पहले उत्पाद अथवा सेवा के बारे में सभी प्रकार की सूचना प्राप्त करने पर जोर देना चाहिए । इससे वह बुद्घिमता, जिम्मेदारी से कार्य कर सकेगा और वह विक्रेता की माल बेचने की कला का शिकार होने से बच सकेगा ।

सुने जाने का अधिकार

अर्थात उपभोक्ता हितों पर उपयुक्त मंचों में समुचित रूप से विचार किया जाएगा । इसमें उपभोक्ता कल्याण पर विचार करने के लिए गठित विभिन्न मंचों में प्रतिनिधित्व का अधिकार भी शामिल है ।

अपेक्षाओं को गैर राजनीतिक तथा गैर वाणिज्यिक संगठन बनाने चाहिए जिनको उपभोक्ताओं से संबंधित मामलों में सरकार द्वारा गठित विभिन्न समितियों तथा अन्य निकायों में प्रतिनिधित्व दिया जा सके ।

सुरक्षा का अधिकार

अर्थात माल और सेवाओं के विपणन से संरक्षण का अधिकार जो जान-माल के लिए खतरनाक हों । खरीदी गई वस्तुएं और ली गई सेवाएं, से उनकी तात्कालिक जरूरतें ही पूरी न हों, अपितु उनके दीर्घकालिक हितों की भी पूर्ति हो । खरीद से पूर्व उपभोक्ता को उत्पादों की गुणवत्ता तथा उत्पादों और सेवाओं की गारंटी पर भी जोर देना चाहिए । उनको अधिमानतः आई एस आई, एगमार्क आदि जैसे गुणवत्ता चिह्न वाले उत्पाद खरीदने चाहिए ।

प्रतितोष पाने का अधिकार

अर्थात अनुचित व्यापार व्यवहारों अथवा बेईमानीपूर्वक उपभोक्ताओं के शोषण के विरुद्घ प्रतितोष प्राप्त करने का अधिकार । इसमें उपभोक्ताओं की वास्तविक शिकायतों का उचित समाधान का अधिकार भी शामिल है । उपभोक्ता अपनी वास्तविक शिकायत की अवश्य रिपोर्ट करें । कई बार उनकी शिकायत बहुत कम मूल्य की हो सकती है किन्तु समूचे समाज पर उसका बहुत अधिक प्रभाव पड सकता । अपनी शिकायतों के प्रतितोष के लिए वे उपभोक्ता संगठनों की सहायता भी ले सकते हैं ।

उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार

अर्थात जीवन भर सूचित उपभोक्ता बने रहने के लिए ज्ञान और कौशल प्राप्त करने का अधिकार । उपभोक्ताओं, विशेष रूप से ग्रामीण उपभोक्ताओं की अज्ञानता उनके शोषण के लिए जिम्मेदार है । उन्हें अपने अधिकारों का ज्ञान होना चाहिए और उन्हें उनका प्रयोग करना चाहिए तभी सफलतापूर्वक वास्तविक उपभोक्ता संरक्षण हासिल किया जा सकता है ।

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